वीडियो जानकारी:
शब्दयोग सत्संग
३० अक्टूबर, २०१६
अद्वैत बोध्स्थल, नॉएडा
प्रसंग:
जिधर देखोगे खुद को पाओगे
मै कौन हूँ?
क्या जैसा हम है वैसी ही हमे संसार मालूम पड़ती है?
अपनी ही छवि में परायेपन का एहसास क्यों देखती है?
मन दूसरे पर दोषारोपण क्यों करता है?
संगीत: मिलिंद दाते